राष्ट्रीय
19-Aug-2026


-मैक्सिकन कार्टेल को जानलेवा ड्रग बनाने जरूरी सामान करती थीं सप्लाई नई दिल्ली,(ईएमएस)। भारत के गुजरात में बसा शहर सूरत में अवैध फेंटेनाइल केमिकल का कारोबार खूब फल-फूल रहा है। हाल ही में अमेरिकी अधिकारियों ने गुजरात के केमिकल हब से जुड़ी उन कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की है जो मैक्सिकन कार्टेल को जानलेवा ड्रग बनाने के लिए जरूरी सामान सप्लाई करती थीं। चीन की ओर से निर्यात पर रोक लगाने के बाद इन गैरकानूनी कार्टेल ने भारत का रुख किया था। मीडिया रिपोर्ट में यूएस ड्रग एनफोर्समेंट एडमिनिस्ट्रेशन के मुताबिक किसी वयस्क की जान लेने के लिए सिर्फ दो मिलीग्राम फेंटेनाइल ही काफी है। इतनी मात्रा जो पेंसिल की नोक पर आ सकती है। हेरोइन से 50 गुना और मॉर्फिन से 100 गुना ज्यादा असरदार फेंटेनाइल 18 से 44 साल की उम्र के अमेरिकियों में अचानक होने वाली मौतों का मुख्य कारण बन गया है। इस संकट का अंदाजा यूएस की जुलाई की एक रिपोर्ट से लगाया जा सकता है, जिसमें कहा गया है कि ओवरडोज से होने वाली करीब 69फीसदी मौतों में सिंथेटिक ओपिओइड शामिल थे, जिनमें से ज्यादातर अवैध रूप से बनाए गए फेंटेनाइल और उससे मिलते-जुलते पदार्थ थे। रिपोर्ट के मुताबिक ओवरडोज से होने वाली करीब 69फीसदी मौतों में सिंथेटिक ओपिओइड शामिल थे, जिनमें से ज्यादातर अवैध रूप से बनाए गए फेंटेनाइल और उससे मिलते-जुलते पदार्थ थे। एक रिपोर्ट के मुताबिक जैसे-जैसे अमेरिका अवैध फेंटेनाइल के इस्तेमाल पर सख्ती कर रहा है, इसका असर भारत के पश्चिमी तट तक भी पहुंच गया है। प्रवर्तन कार्रवाई सूरत के केमिकल और फ़ार्मास्युटिकल हब से जुड़ी कंपनियों तक भी पहुंच गई है। ऐसा माना जा रहा है कि फेंटेनाइल बनाने में इस्तेमाल होने वाले मुख्य पदार्थों पर चीन की रोक से पैदा हुई सप्लाई की कमी को भारत पूरा कर रहा है। फेंटेनाइल अपने आप में कोई अवैध ड्रग नहीं है। कानूनी रूप से बनाया गया फेंटेनाइल आधुनिक चिकित्सा के लिए जरूरी है। इसका इस्तेमाल गंभीर दर्द के इलाज और कैंसर की देखभाल से लेकर एनेस्थीसिया और ट्रॉमा के इलाज तक में होता है। अमेरिका में इस पर कड़ा नियंत्रण है। भारत में फेंटेनाइल नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट के तहत रेगुलेट किया जाता है। हालांकि भारत के रेगुलेटरी सिस्टम का फायदा अवैध काम करने वाले लोग उठा रहे हैं, जो फेंटेनाइल बनाने के लिए केमिकल हासिल करते हैं। ब्रुकलिन में चल रहे एक अमेरिकी फेडरल मामले में सूरत के एक और व्यापारी, रक्सुटर केमिकल्स के भावेश लाठिया का नाम सामने आया है। उन्होंने 50 पाउंड से ज्यादा प्रीकर्सर केमिकल बांटने और उनकी तस्करी करने का जुर्म कबूल किया है। सरकारी वकीलों ने बताया कि उन्होंने ऑनलाइन बिक्री में बिचौलिये का काम किया और कस्टम से बचने के लिए जानबूझकर शिपमेंट पर विटामिन सी और एंटासिड जैसे गलत लेबल लगाए। उन्हें 40 साल की जेल हो सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक सालों तक मैक्सिकन गिरोह अपने कई प्रीकर्सर केमिकल चीन से मंगाते थे। लेकिन जांचकर्ताओं का कहना है कि जैसे-जैसे बीजिंग ने सख्ती बढ़ाई, खरीद के नेटवर्क भारत की ओर मुड़ने लगे। गुजरात पर एजेंसियों का ध्यान इसलिए है क्योंकि भारत के केमिकल व्यापार में इसकी अहम भूमिका है। राज्य में 5,000 से ज्यादा केमिकल यूनिट्स हैं और देश के कुल केमिकल उत्पादन का करीब 50फीसदी हिस्सा यहीं से आता है। यहां करीब 3,000 फार्मास्युटिकल यूनिट्स भी हैं। मुंद्रा और पिपावाव जैसे गहरे पानी वाले बंदरगाह मध्य अमेरिका तक सीधे समुद्री रास्ते की सुविधा देते हैं, जबकि भारत का करीब 60 अरब डॉलर का फार्मा उद्योग दुनिया के सबसे बड़े ऐसे इकोसिस्टम में से एक है। इसी इकोसिस्टम का इस्तेमाल करके बेईमान लोग गैर-कानूनी बिक्री करते हैं। अमेरिकी इंटेलिजेंस कम्युनिटी की 2025 की सालाना खतरे की रिपोर्ट में गैर-कानूनी फेंटेनाइल प्रीकर्सर और गोली बनाने वाली मशीनों के स्रोत के तौर पर भारत को चीन के बाद दूसरे नंबर पर रखा है, लेकिन इसका पता लगाना मुश्किल है। इंटरनेशनल नारकोटिक्स कंट्रोल बोर्ड की 2025 की सालाना रिपोर्ट में 2024 की दूसरी छमाही में यूरोप में चार खेप पकड़े जाने का जिक्र है, जिसमें बताया गया है कि यह पदार्थ भारत से आया था। सिराज/ईएमएस 19अगस्त26