- सरकारी चावल घोटाला :‘पावर कनेक्शन’ बेनकाब, - SIT की बड़ी कार्रवाई, तीन बार पूछताछ के बाद पुलिस ने किया गिरफ्तार - हर्ष राइस मिल से खुला खेल, CCTV और दस्तावेजों ने खोली पोल - चावल हेराफेरी में एथेनॉल प्लांट से मिलीभगत के पुलिस को मिले पुख्ता सबूत बालाघाट (ईएमएस)। मध्यप्रदेश के बहुचर्चित फोर्टिफाइड चावल घोटाले में अब सत्ता के संरक्षण की परतें खुलने लगी हैं। एसआईटी ने गुरुवार देर रात बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व मंत्री और भाजपा जिलाध्यक्ष रामकिशोर कावरे और उनके बड़े भाई राजकुमार (कुमार) कावरे के भतीजे अविनाश कावरे को गिरफ्तार कर लिया। इस गिरफ्तारी ने साफ कर दिया है कि घोटाले की जड़ें सिर्फ कारोबार तक सीमित नहीं, बल्कि सत्ता के गलियारों तक गहराई से फैली हैं। एसआईटी ने अविनाश को तीन बार हिरासत में लेकर कड़ी पूछताछ की। CCTV फुटेज, दस्तावेज और आरोपियों के बयानों ने पूरे खेल की परत-दर-परत सच्चाई खोल दी। पुख्ता साक्ष्य मिलने के बाद ही पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार अविनाश कावरे को शुक्रवार को वारासिवनी न्यायालय में पेश कर पांच दिन की पुलिस रिमांड मांगी गई थी। न्यायालय ने 3 अगस्त तक रिमांड मंजूर की है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला मुख्यालय से करीब 10 किमी दूर टेकाड़ी स्थित हर्ष राइस इंडस्ट्री का 20 प्रतिशत साझेदार अविनाश कावरे लंबे समय से एसआईटी के निशाने पर था। जांच में सामने आया है कि वह अपने साथी आरोपी विनोद शर्मा के साथ मिलकर एफसीआई गोदाम से छिंदवाड़ा के एथेनॉल प्लांट के लिए जारी सरकारी चावल को रास्ते में ही ‘गायब’ कर देता था। संगठित तरीके से कर रहे थे चावल घोटाला जांच एजेंसी के हाथ ऐसे सबूत लगे हैं, जो सीधे एथेनॉल प्लांट प्रबंधन से सांठगांठ की ओर इशारा करते हैं। सरकारी चावल की यह हेराफेरी संगठित तरीके से की जा रही थी, जिसमें कई स्तर पर मिलीभगत सामने आ रही है। हर्ष राइस मिल के मुनीम पर भी कस सकता है शिकंजा इस नेटवर्क की दूसरी मजबूत कड़ी हर्ष राइस मिल का मैनेजर (मुनीम) बताया जा रहा है। एसआईटी जल्द ही उसे भी शिकंजे में लेने की तैयारी में है, हालांकि फिलहाल उसका नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है। सूत्रों के अनुसार, एसआईटी ने अब तक बड़ी मात्रा में खाली बोरियां, ट्रांजेक्शन से जुड़े दस्तावेज और अन्य अहम सबूत जुटा लिए हैं। जांच अब निर्णायक चरण में है और किसी भी समय और बड़े खुलासे हो सकते हैं। मिल से चार ट्रक और खाली बोरे भी जब्त कर चुकी है पुलिस जानकारी के अनुसार 28 जुलाई को एसआईटी ने हर्ष राइस इंडस्ट्री पर छापा मारकर 100 से ज्यादा खाली बोरे और चार ट्रक जब्त किए थे। शुरुआती जांच में ही मिल परिसर में चावल उतारने के सीसीटीवी फुटेज ने पूरे खेल का पर्दाफाश कर दिया था। अविनाश की गिरफ्तारी के बाद अब सबसे बड़ा सवाल पूर्व मंत्री के बड़े भाई कुमार कावरे पर खड़ा हो गया है। कांग्रेस पहले ही आरोप लगा चुकी है कि इस पूरे मामले में दबाव बनाकर जांच को प्रभावित करने की कोशिश की गई। लेकिन अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं। एसआईटी की कार्रवाई ने साफ संकेत दे दिया है कि घोटाले में चाहे जितना बड़ा नाम हो, अब बचना मुश्किल है। सूत्रों का दावा है कि आने वाले दिनों में इस हाई-प्रोफाइल घोटाले में और भी बड़े चेहरे बेनकाब हो सकते हैं।