चेन्नई,(ईएमएस)। तमिलनाडु सरकार ने हाल ही में दो महत्वपूर्ण घोषणाएँ की हैं, जिसमें से एक सामाजिक कल्याण से जुड़ी है और दूसरी ने व्यापक विवाद उत्पन्न किया था। राज्य की विजय सरकार ने महिला कर्मचारियों के लिए तीसरे बच्चे के जन्म पर मिलने वाले मातृत्व अवकाश को 12 सप्ताह से बढ़ाकर 365 दिन करने का निर्णय किया है, जो पहले दो बच्चों के लिए मिलने वाले अवकाश के बराबर है। विजय सरकार में मानव संसाधन प्रबंधन मंत्री डी. सरथकुमार ने राज्य विधानसभा को संबोधित कर बताया कि यह निर्णय तमिलनाडु सरकार की सामाजिक कल्याण और महिला सशक्तिकरण को प्राथमिकता देने वाली नीति के अनुरूप है। यह कदम तब आया है जब राज्य में मातृत्व अवकाश की अवधि को पहले भी कई बार बढ़ाया गया है। 2011 में छह महीने, 2016 में नौ महीने और जुलाई 2021 में एक साल किया गया। अब, जिन महिला सरकारी कर्मचारियों के दो से अधिक जीवित बच्चे हैं, उन्हें भी पूर्ण वेतन के साथ एक साल का मातृत्व अवकाश मिलेगा, जिसके लिए विस्तृत आदेश जल्द ही जारी किए जाएँगे। हालांकि, विजय सरकार का एक और कदम व्यापक आलोचना का शिकार हुआ, जिसके बाद तमिलनाडू सरकार को वापस लेना पड़ा। 14 अगस्त को एक अत्यंत ज़रूरी निर्देश जारी किया गया था, जिसमें सभी विश्वविद्यालयों, स्कूल शिक्षा विभाग, उच्च शिक्षा विभाग, पुलिस और ज़िला प्रशासन को छात्रों को वामपंथी दलों और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा आयोजित राजनीतिक विरोध-प्रदर्शनों में भाग लेने से रोकने के लिए कदम उठाने का निर्देश दिया गया था। इस निर्देश में कॉलेजों से की गई कार्रवाई का विवरण तुरंत कॉलेज शिक्षा निदेशालय को सौंपने को कहा गया था। सीजेपी ने आदेश को असंवैधानिक बताकर तत्काल वापस लेने की मांग की। चौतरफा विरोध-प्रदर्शनों और आलोचनाओं के बाद, विजय के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार ने विवादास्पद निर्देश को वापस ले लिया है, जिससे छात्रों और युवाओं को विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने की स्वतंत्रता पर लगे संभावित प्रतिबंध का खतरा टल गया। आशीष दुबे / 19 अगस्त 2026