संसद मार्च के दौरान घायल हुए छात्रों का दर्द नई दिल्ली,(ईएमएस)। नीट पेपर लीक के खिलाफ हुए संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा को एक महीना पूरा हो चुका है, लेकिन घटना में पैलेट गन के छर्रे लगने से घायल हुए छात्रों के जख्म अभी भी ताजा हैं। पीड़ितों को इस बात की टीस ज्यादा है कि जिस कॉकराच जनता पार्टी (सीजेपी) ने उन्हें समर्थन का आश्वासन दिया था, वह अब उनका हाल भी नहीं पूछ रही है। नजफगढ़ के छात्र साहिल लोचव की दूसरी सर्जरी के बावजूद दाईं आंख की रोशनी वापस नहीं लौट सकी है। 19 वर्षीय साहिल की आंख में पैलेट के छर्रे लगने से कॉर्निया में छेद हुआ था। उसकी मां ज्योति बताती हैं कि 20 जुलाई की घटना में साहिल की आंख और हाथ में छर्रे लगे थे, जिसमें से सभी अब तक नहीं निकाले जा सके हैं। इससे उसका एक हाथ भी ठीक से काम नहीं कर रहा। एम्स ट्रॉमा सेंटर में आंख की सर्जरी और बाद में लेंस डालने के बावजूद रोशनी नहीं लौटी है। स्नातक द्वितीय वर्ष के छात्र साहिल की पढ़ाई गंभीर रूप से प्रभावित हुई है और वह अभी भी अस्पताल में भर्ती है। वहीं मध्य प्रदेश के जबलपुर निवासी इरशाद मंसूरी के चेहरे, आंख के पास, छाती और शरीर के कई हिस्सों में पैलेट गन के करीब 40 छर्रे लगे थे। 21 जुलाई को लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में सर्जरी कर कुछ छर्रे निकाले गए, लेकिन कई अभी भी शरीर में मौजूद हैं। गुरुग्राम की कॉरपोरेट कंपनी में कार्यरत इरशाद पूरी तरह स्वस्थ नहीं हुए हैं और घाव नहीं भरने के कारण ड्यूटी जॉइन नहीं कर सके हैं। बिहार के 25 वर्षीय छात्र प्रशांत के हाथ, छाती और कमर में पैलेट के छर्रे लगे थे, जिससे उनका दायां हाथ कुछ समय के लिए सुन्न पड़ गया था। डॉक्टरों ने कुछ छर्रे निकाले, लेकिन कई छोटे छर्रे मांसपेशियों में गहराई तक धंसे हैं, जिन्हें निकालने से और अधिक घाव होने का डर है। प्रशांत अब नौकरी की तैयारी करते हुए भी पहले जैसा सामान्य महसूस नहीं कर रहे हैं। साहिल की मां और प्रशांत दोनों ने बताया कि घटना के बाद से सीजेपी की तरफ से किसी ने उनसे संपर्क नहीं किया है। जख्मी प्रदर्शनकारियों में अब यह कड़वाहट साफ दिखती है कि राजनीतिक दल ने उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया है। आशीष दुबे / 19 अगस्त 2026