इन्दौर (ईएमएस) मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खंडपीठ इन्दौर में जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस आलोक अवस्थी की युगलपीठ ने इन्दौर के आइटीआइ में मूक-बधिर छात्रों के साथ कथित दुर्व्यवहार को लेकर दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश एडवोकेट शन्नो शगुफ्ता खान ने कोर्ट को बताया कि आइटीआइ में दिव्यांग छात्रों के प्रवेश हेतु आइटीआइ प्रबंधन द्वारा लगाई गई शर्त हाईकोर्ट के पूर्व आदेश की भावना के विपरीत है और इससे बड़ी संख्या में मूक-बधिर छात्रों के लिए प्रवेश के रास्ते बंद हो सकते है। जिस पर कोर्ट ने सरकार से जवाब मांग अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद निर्धारित की है। एडवोकेट शगुफ्ता खान के अनुसार शहर में संचालित आइटीआइ के दो केंद्रों में से नंदानगर केंद्र में इलेक्ट्रिशियन और फीटर जैसे रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रम शामिल हैं, जबकि दूसरे केंद्र पर कंप्यूटर से जुड़े पाठ्यक्रम संचालित किए जाते हैं। पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने न्यूनतम योग्यता पूरी करने वाले मूक-बधिर छात्रों को उनकी पसंद के पाठ्यक्रम में प्रवेश देने के निर्देश दिए थे। इस आदेश के पालन के बजाय आइटीआइ प्रबंधन ने नई शर्तें जोड़ दी गईं, जिससे प्रवेश में बाधा उत्पन्न हो रही है। इससे कोर्ट को सुनवाई दौरान अवगत कराया जिस पर कोर्ट ने शासन से जवाब मांगा है। आनंद पुरोहित/ 19 अगस्त 2026