राज्य
19-Aug-2026


हाईकोर्ट ने कहा- डोमिसाइल में अधिकारी की गलती का खामियाजा छात्रा को नहीं भुगताया जा सकता :रादुविवि को डिग्री जारी करने के निर्देश जबलपुर, (ईएमएस)। मप्र उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया व न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की संयुक्तपीठ ने तेरह साल तक कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद एक पूर्व मेडिकल छात्रा को आखिरकार राहत देते हुए नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज, जबलपुर की पूर्व एमबीबीएस छात्रा शैलजा पांडे का वर्ष 2013 में निरस्त किया गया प्रवेश बहाल कर दिया है। न्यायालय ने मामले में सुनवाई के बाद रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर को छात्रा की एमबीबीएस की डिग्री जारी करने के निर्देश दिए हैं। आवेदक छात्रा शैलजा पांडे को हालांकि चिकित्सा व्यवसाय शुरू करने से पहले राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के समक्ष निर्धारित परीक्षा देनी होगी। प्रकरण के मुताबिक जबलपुर, अधारताल निवासी शैलजा पांडे ने वर्ष 2005 में मध्य प्रदेश से 12वीं उत्तीर्ण की थी। इसके बाद उसे वर्ष 2010 में पीएमटी के माध्यम से राज्य कोटे में मेडिकल कॉलेज में प्रवेश मिला। उन्होंने एमबीबीएस की प्रथम और द्वितीय वर्ष की परीक्षाएं प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण कीं और पाठ्यक्रम भी पूरा कर लिया। इसके बाद 13 जून, 2013 को मूल निवासी प्रमाण पत्र से जुड़े नियम का हवाला देकर उसका प्रवेश निरस्त कर दिया गया। इसके खिलाफ छात्रा शैलजा पांडे ने उसी वर्ष याचिका के माध्यम से उच्च न्यायालय की शरण ली। मामले में सुनवाई के दौरान छात्रा की ओर से अधिवक्ता नीलेश कुमार जैन ने पक्ष रखा। न्यायालय ने माना कि छात्रा ने कोई तथ्य नहीं छिपाया और न ही धोखाधड़ी की। मूल निवास प्रमाण पत्र जारी करने में सक्षम अधिकारी से नियम की व्याख्या में गलती हुई थी। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अधिकारी की गलती का खामियाजा छात्रा को नहीं भुगताया जा सकता। प्रवेश के समय आपत्ति थी तो उसी समय कार्रवाई होनी चाहिए थी, न कि मेडिकल शिक्षा पूरी कराने के बाद। इस मत के साथ उच्च न्यायालय ने रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय को डिग्री जारी करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही स्पष्ट किया कि चिकित्सक के रूप में प्रैक्टिस के लिए शैलजा पांडे को एनएमसी की निर्धारित परीक्षा पास करना आवश्यक होगा। अजय पाठक / मोनिका / 19 अगस्त 2026/ 02.00