भोपाल (ईएमएस)। प्रदेश के निजी विश्वविद्यालय के शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लंबित प्रवेश दर्ज कराने के लिए एमपी ऑनलाइन प्रवेश पोर्टल दोबारा खोलने को लेकर चल रहे विवाद के बीच मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग में बड़ा प्रशासनिक घटनाक्रम सामने आया है। आयोग के सचिव देवेंद्र गुर्जर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब निजी विश्वविद्यालय लगातार विभाग के माध्यम से पुराने शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए एमपी ऑनलाइन पोर्टल दोबारा खोलने का दबाव बना रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक आयोग के अध्यक्ष, सदस्य और सचिव देवेंद्र गुर्जर के बीच पिछले कुछ समय से कार्यप्रणाली और महत्वपूर्ण निर्णयों को लेकर खींचतान चल रही थी। चर्चा है कि एमपी ऑनलाइन पोर्टल दोबारा खोलने के मुद्दे पर भी राय अलग-अलग थी। सचिव देवेंद्र सिंह गुर्जर अपनी ईमानदार कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं और वे नहीं चाहते थे कि आयोग ऐसा कोई निर्णय ले, जिससे उसकी निष्पक्षता और स भोपाल (ईएमएस)। प्रदेश के निजी विश्वविद्यालय के शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लंबित प्रवेश दर्ज कराने के लिए एमपी ऑनलाइन प्रवेश पोर्टल दोबारा खोलने को लेकर चल रहे विवाद के बीच मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग में बड़ा प्रशासनिक घटनाक्रम सामने आया है। आयोग के सचिव देवेंद्र गुर्जर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब निजी विश्वविद्यालय लगातार विभाग के माध्यम से पुराने शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए एमपी ऑनलाइन पोर्टल दोबारा खोलने का दबाव बना रहे हैं।सूत्रों के मुताबिक आयोग के अध्यक्ष, सदस्य और सचिव देवेंद्र गुर्जर के बीच पिछले कुछ समय से कार्यप्रणाली और महत्वपूर्ण निर्णयों को लेकर खींचतान चल रही थी। चर्चा है कि एमपी ऑनलाइन पोर्टल दोबारा खोलने के मुद्दे पर भी राय अलग-अलग थी। सचिव देवेंद्र सिंह गुर्जर अपनी ईमानदार कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं और वे नहीं चाहते थे कि आयोग ऐसा कोई निर्णय ले, जिससे उसकी निष्पक्षता और साख पर सवाल खड़े हों। एक्सप्रेस न्यूज़ ने सबसे पहले उठाया था मामला एमपी ऑनलाइन प्रवेश पोर्टल विवाद को एक्सप्रेस न्यूज़ ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। आयोग के निर्णय, निजी विश्वविद्यालयों की मांग और संभावित अनियमितताओं को लेकर प्रकाशित खबर के बाद पूरे मामले में हलचल तेज हो गई। इसके बाद उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह का बयान सामने आया और अब आयोग के सचिव देवेंद्र गुर्जर के इस्तीफे ने इस विवाद को नया मोड़ दे दिया है। वर्तमान में सचिव का पद खाली सचिव देवेंद्र सिंह गुर्जर के इस्तीफे के बाद आयोग में अभी सचिव की नियुक्ति नहीं हुई है। आयोग में सचिव की नियुक्ति की प्रक्रिया राज्य सरकार के माध्यम से होती है तथा इसमें मुख्यमंत्री और राज्यपाल स्तर पर अनुमोदन की प्रक्रिया भी शामिल रहती है। ऐसे में नियमित नियुक्ति होने में कुछ समय लग सकता है। हालांकि सूत्र बताते है कि जिस स्तर पर आयोग पर दवाब की कार्यप्रणाली चल रही है उसके चलते अब यहा इस पद पर कोई आना नहीं चाहता है। फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम पर सभी की नजर आयोग के अगले कदम पर है। यदि आयोग अपने 2 जून 2026 के निर्णय से अलग कोई फैसला लेता है, तो उसकी निर्णय प्रक्रिया और स्वायत्तता पर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं। वहीं आयोग के सचिव के इस्तीफे ने यह संकेत भी दिए हैं कि पोर्टल विवाद केवल प्रवेश प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब यह आयोग के भीतर प्रशासनिक मतभेदों का कारण भी बन गया है। कलेक्टरों के सिर पर ठीकरा फोड़ने की तैयारी ? सूत्रों के अनुसार आयोग पुराने सत्र का एमपी ऑनलाइन पोर्टल सीधे दोबारा खोलने के बजाय नया रास्ता तलाश रहा है। चर्चा है कि लंबित प्रवेशों की जांच और सत्यापन की जिम्मेदारी संबंधित जिलों के कलेक्टरों को सौंपी जा सकती है। कलेक्टरों की रिपोर्ट के आधार पर पात्र विद्यार्थियों का डेटा पोर्टल पर दर्ज कराया जा सकता है। सूत्रों का दावा है कि इस व्यवस्था के जरिए आयोग अंतिम निर्णय की जिम्मेदारी अपने ऊपर लेने के बजाय कलेक्टरों पर डालना चाहता है। यानी यदि किसी प्रवेश को लेकर भविष्य में विवाद या जांच होती है, तो उसका आधार कलेक्टर स्तर पर किया गया सत्यापन होगा। हालांकि आयोग की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि या आदेश जारी नहीं किया गया है।