राज्य
19-Jul-2026
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ग्वालियर (ईएमएस)। मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने जीआरएमसी के नेत्र रोग विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. देवेंद्र कुमार शाक्य के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए उन्हें सात दिन के भीतर विभागाध्यक्ष नियुक्त करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी गंभीर बीमारी का उपचार चलना अपने आप में किसी योग्य अधिकारी को पद की जिम्मेदारी से वंचित करने का आधार नहीं हो सकता। न्यायमूर्ति आनंद पाठक की एकलपीठ ने 29 अप्रैल 2026 को पारित उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसके तहत डॉ. शाक्य को विभागाध्यक्ष पद से वंचित किया गया था। डॉ. शाक्य लगभग 35 वर्षों से जीआरएमसी में सेवाएं दे रहे हैं और नेत्र रोग विभाग के सबसे वरिष्ठ प्रोफेसर हैं। वे दिसंबर 2020 से सितंबर 2023 तक विभागाध्यक्ष के रूप में सफलतापूर्वक कार्य भी कर चुके हैं। प्रशासन ने उनके खिलाफ पुराने दंड और कैंसर के उपचार को आधार बनाकर अतिरिक्त प्रशासनिक जिम्मेदारी निभाने में संभावित कठिनाई का तर्क दिया था। हालांकि, हाई कोर्ट ने कहा कि जब तक यह साबित न हो कि बीमारी के कारण अधिकारी के कार्य निष्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है, तब तक बीमारी को अयोग्यता का आधार नहीं बनाया जा सकता। अदालत ने यह भी माना कि डॉ. शाक्य ने पहले विभागाध्यक्ष के रूप में कार्य किया और उस दौरान उनके खिलाफ कोई शिकायत या विभागीय कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में बाद में बीमारी और पुराने दंड के आधार पर उन्हें पद से वंचित करना उचित नहीं है। हाई कोर्ट के इस फैसले को डॉ. शाक्य की 35 वर्षों की सेवा, वरिष्ठता और कार्यक्षमता की महत्वपूर्ण न्यायिक मान्यता माना जा रहा है। फैसले के बाद अब राज्य शासन और मेडिकल कॉलेज प्रशासन को निर्धारित अवधि में उन्हें विभागाध्यक्ष नियुक्त करना होगा।