राज्य
12-Jul-2026
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- 31 दिसंबर तक मिला था मौका, नया सत्र शुरू होने के बाद अब पुराने प्रवेश दर्ज कराने की मांग (राम पंवार) भोपाल (ईएमएस)। मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग की सख्ती के बाद प्रदेश के निजी विश्वविद्यालयों में हलचल तेज हो गई है। आयोग ने सत्र 2025-26 के लिए प्रवेश पोर्टल दोबारा खोलने से स्पष्ट इनकार कर दिया है। इसके बाद निजी विश्वविद्यालय संघ शासन पर पोर्टल फिर से खुलवाने के लिए लगातार दबाव बना रहा है। आयोग के अनुसार सत्र 2025-26 के विद्यार्थियों का विवरण एमपी ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करने के लिए 31 दिसंबर 2025 तक पर्याप्त समय दिया गया था। इसके बावजूद कई निजी विश्वविद्यालय निर्धारित समय-सीमा के भीतर विद्यार्थियों का डेटा दर्ज नहीं कर सके। अब जबकि सत्र 2026-27 की प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, आयोग का कहना है कि पिछले शैक्षणिक सत्र के लिए पोर्टल दोबारा खोलना नियमों और प्रवेश प्रक्रिया की पारदर्शिता के विपरीत होगा। आयोग का मानना है कि समय-सीमा समाप्त होने के बाद पोर्टल खोलने की परंपरा शुरू हुई तो भविष्य में विश्वविद्यालयों से समयबद्ध पालन कराना कठिन हो जाएगा और पूरी प्रवेश प्रक्रिया की विश्वसनीयता प्रभावित होगी। प्रदेश में वर्तमान में लगभग 53 निजी विश्वविद्यालय संचालित हैं, ऐसे में एक बार दी गई छूट भविष्य के लिए मिसाल बन सकती है। उच्च शिक्षा विभाग के सूत्रों का कहना है कि आयोग की सख्ती का एक प्रमुख उद्देश्य प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना भी है। सूत्रों के मुताबिक, समय-सीमा समाप्त होने के बाद पोर्टल खुलने पर कुछ संस्थानों द्वारा विद्यार्थियों से अतिरिक्त शुल्क लेकर बैक-डेट में प्रवेश दर्ज कराने की आशंका रहती है। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और आयोग ने भी अपने आदेश में इस संबंध में कोई प्रत्यक्ष टिप्पणी नहीं की है। आयोग का केवल इतना कहना है कि निर्धारित समय-सीमा के बाद किसी भी प्रकार की छूट प्रवेश प्रक्रिया की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकती है। दूसरी ओर, निजी विश्वविद्यालय संघ का दावा है कि तकनीकी कारणों से कई विद्यार्थियों का डेटा पोर्टल पर अपलोड नहीं हो सका। संघ ने उच्च शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर सात दिनों के लिए पोर्टल दोबारा खोलने की मांग की है, ताकि छूटे हुए विद्यार्थियों का विवरण अपलोड किया जा सके। फिलहाल आयोग अपने निर्णय पर अडिग है। अब निगाहें राज्य शासन पर टिकी हैं कि वह आयोग के निर्णय को यथावत रखता है या निजी विश्वविद्यालयों की मांग पर कोई अलग फैसला लेता है। आयोग का संदेश स्पष्ट है कि प्रवेश प्रक्रिया में नियमों और समय-सीमा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। शासकीय विश्वविद्यालय समय पर, फिर निजी विश्वविद्यालय क्यों पीछे ? इस पूरे विवाद के बीच एक महत्वपूर्ण सवाल भी सामने आ रहा है। प्रदेश के शासकीय विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक सत्र जून-जुलाई से शुरू होकर अक्टूबर तक प्रवेश प्रक्रिया पूरी हो जाती है और निर्धारित समय-सीमा का पालन भी सुनिश्चित किया जाता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब सरकारी विश्वविद्यालय तय समय में प्रवेश प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं, तो निजी विश्वविद्यालयों में बार-बार समय-सीमा बढ़ाने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है? आयोग की सख्ती के बाद यह सवाल उच्च शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और समयबद्धता को लेकर नई बहस छेड़ रहा है। इन पाठ्यक्रमों में प्रवेश का मामला निजी विश्वविद्यालयों में बीटेक, एमटेक, बीएससी, एमएससी, बीबीए, एमबीए, एलएलबी और एलएलएम सहित विभिन्न स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में सत्र 2025-26 के प्रवेश का मामला विवाद का कारण बना हुआ है। आयोग का कहना है कि इन पाठ्यक्रमों में जिन विद्यार्थियों के प्रवेश का विवरण 31 दिसंबर 2025 तक पोर्टल पर दर्ज नहीं किया गया, उन्हें अब नए शैक्षणिक सत्र शुरू होने के बाद अपलोड करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। संघ ने मांगा था सात दिन का समय इंजीनियर संजीव अग्रवाल की अध्यक्षता वाले निजी विश्वविद्यालय संघ ने 4 जून 2026 को उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार को पत्र लिखकर एमपी ऑनलाइन पोर्टल को सात दिनों के लिए पुनः खोलने का अनुरोध किया था। पत्र में संघ ने बताया था कि शैक्षणिक सत्र 2025-26 में विभिन्न निजी विश्वविद्यालयों में प्रवेश लेने वाले अनेक विद्यार्थियों का विवरण एमपी ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज नहीं हो सका है।संघ के अनुसार, पोर्टल पर एक छात्र की जानकारी कई चरणों में दर्ज करनी पड़ती है, जिससे प्रक्रिया में अधिक समय लगता है। इसी कारण कुछ विद्यार्थियों का डेटा निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपलोड नहीं हो पाया।संघ ने मंत्री से अनुरोध किया था कि आयोग को एमपी ऑनलाइन पोर्टल सात दिनों के लिए पुनः खोलने के निर्देश दिए जाएं, ताकि जिन विद्यार्थियों का विवरण अपलोड होने से रह गया है, उसे दर्ज किया जा सके। संघ का कहना था कि ऐसा नहीं होने पर संबंधित विद्यार्थी छात्रवृत्ति के लाभ से वंचित हो सकते हैं। मंत्री की ओर से इस संबंध में यथोचित कार्यवाही के लिए निर्देश भी जारी किए गए थे। आयोग सभा ने किया अमान्य दिनांक 2 जून को आयोजित आयोग सभा में विस्तृत चर्चा के उपरांत यह निर्णय लिया गया कि विद्यार्थियों के डेटा अपलोड करने हेतु एमपी ऑनलाइन पोर्टल दिनांक 31 दिसंबर 2025 तक खुला रखा गया था। वर्तमान में शैक्षणिक सत्र 2025-26 समाप्त हो चुका है और शैक्षणिक सत्र 2026-27 की प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। उक्त परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए विश्वविद्यालयों से पोर्टल पुनः खोलने हेतु प्राप्त सभी आवेदन अमान्य किए जाते हैं। अतः आयोग सभा के निर्णय के अनुसार एमपी ऑनलाइन पोर्टल पुनः खोलने का निजी विश्व विद्यालय संघ द्वारा किया गया अनुरोध अमान्य किया जाता है।