(त्वरित टिपण्णी: सौरभ जैन अंकित) भोपाल (ईएमएस)। दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए भाजपा ने आशुतोष तिवारी को प्रत्याशी बनाकर केवल एक टिकट घोषित नहीं किया, बल्कि पार्टी के भीतर कई बड़े नेताओं के लिए एक राजनीतिक संदेश भी जारी कर दिया। सबसे बड़ा झटका पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को माना जा रहा है, जिनका नाम लंबे समय से सबसे मजबूत दावेदार के रूप में चर्चा में था। लेकिन भाजपा ने अंतिम समय में ऐसा दांव चला कि तमाम राजनीतिक कयास धरे रह गए। दरअसल, भाजपा पहले भी यह स्पष्ट कर चुकी है कि पार्टी में व्यक्ति नहीं, संगठन सर्वोपरि है। 2023 के विधानसभा चुनाव में केंद्रीय नेताओं को प्रदेश की राजनीति में उतारकर यह संदेश दिया गया था कि जिम्मेदारी वहीं मिलेगी, जहां पार्टी तय करेगी। अब दतिया में टिकट वितरण ने इस संदेश पर एक और मुहर लगा दी है। डॉ. नरोत्तम मिश्रा को भाजपा का संकटमोचक माना जाता रहा है, लेकिन इस बार पार्टी ने मानो यह जता दिया कि पुराने राजनीतिक कद से अधिक महत्व वर्तमान राजनीतिक समीकरणों का है। 2023 के चुनाव में गृहमंत्री रहते हुए उनकी हार पहले ही उनकी राजनीतिक चमक को फीका कर चुकी थी। हार के बाद उनका चर्चित शेर मैं लौटकर आऊंगा, समुद्र का पानी उतरे तो किनारा खाली देखकर घर मत बना लेना, काफी सुर्खियों में रहा था। लेकिन इस बार ऐसा लगता है कि किनारे पर लौटने की जगह ही नहीं छोड़ी गई। राजनीतिक गलियारों में अब यह चर्चा है कि भाजपा ने नरोत्तम मिश्रा के बहाने उन सभी नेताओं को संकेत दिया है, जो खुद को संगठन से बड़ा मानने की भूल कर बैठते हैं। दतिया का टिकट यह बताने के लिए काफी है कि भाजपा में अंतिम फैसला चेहरों का नहीं, नेतृत्व का चलता है। अब यह रणनीति चुनावी मैदान में कितना असर दिखाती है, इसका जवाब 30 जुलाई के मतदान और उसके बाद आने वाले नतीजे देंगे।