- जिला संगठन की रिपोर्ट के बाद बढ़ी राजनीतिक हलचल टीकमगढ़ (ईएमएस)। मध्य प्रदेश भाजपा की राजनीति में एक बार फिर पूर्व विधायक के.के. श्रीवास्तव की संभावित वापसी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार टीकमगढ़ जिला संगठन ने प्रदेश भाजपा नेतृत्व को भेजी अपनी रिपोर्ट में सुझाव दिया है कि के.के. श्रीवास्तव की घर वापसी से पार्टी को जिले में राजनीतिक लाभ मिल सकता है। इसके बाद भाजपा के स्थानीय और क्षेत्रीय नेताओं के बीच राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। गौरतलब है कि के.के. श्रीवास्तव टीकमगढ़ विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के विधायक रह चुके हैं और लंबे समय तक पार्टी संगठन तथा चुनावी राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान टिकट वितरण को लेकर उनकी नाराजगी खुलकर सामने आई थी। भाजपा द्वारा टिकट नहीं दिए जाने के बाद उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था और नेतृत्व पर उपेक्षा का आरोप लगाया था। उस समय श्रीवास्तव ने कहा था कि उन्होंने वर्षों तक भाजपा के लिए निष्ठा और समर्पण के साथ कार्य किया, लेकिन चुनाव के समय उनकी अनदेखी की गई। उनके इस्तीफे को भाजपा के लिए बुंदेलखंड क्षेत्र में एक बड़ा राजनीतिक झटका माना गया था। अब करीब तीन वर्ष बाद परिस्थितियां बदलती दिखाई दे रही हैं। पार्टी के स्थानीय नेताओं का मानना है कि टीकमगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में के.के. श्रीवास्तव का अपना प्रभाव और समर्थक वर्ग आज भी मौजूद है। संगठन की रिपोर्ट में कथित तौर पर यह उल्लेख किया गया है कि यदि उनकी भाजपा में वापसी होती है तो आगामी चुनावों में पार्टी को इसका लाभ मिल सकता है। हालांकि, के.के. श्रीवास्तव की वापसी को लेकर पार्टी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। प्रदेश नेतृत्व भी इस विषय पर सार्वजनिक रूप से कुछ कहने से बच रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा आगामी चुनावी रणनीति को ध्यान में रखते हुए उन नेताओं को पुनः साथ जोड़ने का प्रयास कर सकती है जिनका अपने क्षेत्रों में प्रभाव बना हुआ है। उल्लेखनीय है कि के.के. श्रीवास्तव का राजनीतिक जीवन विवादों से भी अछूता नहीं रहा है। पूर्व में उन पर एक सीईओ के अपहरण से जुड़े मामले में प्रकरण दर्ज हुआ था, जिसके चलते उन्हें जेल भी जाना पड़ा था। हालांकि उनके समर्थकों का कहना है कि राजनीतिक रूप से उनकी स्वीकार्यता और जनाधार आज भी मजबूत है। फिलहाल भाजपा संगठन और के.के. श्रीवास्तव दोनों की ओर से कोई औपचारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जिला संगठन की रिपोर्ट सामने आने के बाद टीकमगढ़ की राजनीति में उनकी संभावित वापसी को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। अब सभी की नजर प्रदेश भाजपा नेतृत्व के अगले निर्णय पर टिकी हुई है।