जेल में रहकर भी इमरान का रुतबा नहीं हुआ कम इस्लामाबाद (ईएमएस)। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को जेल में रहते हुए अपने परिवार से मुलाकात करने और निजी अस्पताल में इलाज करने की अनुमति मिलने से देश के सत्ता गलियारों में हलचल मची हुई है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेनाध्यक्ष असीम मुनीर के नेतृत्व वाले प्रतिष्ठान में फैसले को लेकर गहरी चिंता और बेचैनी देखी जा रही है। इस्लामाबाद से लेकर रावलपिंडी तक में स्थिति से निपटने के तरीकों पर गहन बैठकों का दौर शुरू हो चुका है। रिपोर्टों के अनुसार, अदालत से इमरान को मिली इस राहत ने सत्ता प्रतिष्ठान के लिए सबसे बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि अगर जेल में बंद इमरान को परिवार, निजी डॉक्टरों और समर्थकों से संपर्क के रास्ते फिर से खुल जाते हैं, तब क्या उनकी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) फिर संगठित होकर मैदान में लौट सकती है? यह आशंका सरकार से लेकर सैन्य प्रतिष्ठान तक के लिए असहज करने वाली है, क्योंकि पाकिस्तान की सियासत में इमरान की सबसे बड़ी ताकत जेल में रहते हुए भी कायम उनका राजनीतिक असर है। मंगलवार को अदियाला जेल में इमरान से उनकी बहन नोरीन नियाजी और पत्नी बुशरा बीबी ने मुलाकात की। यह मुलाकात सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद संभव हुई जिसके तहत परिवार को नियमित मुलाकात की अनुमति मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि परिवार से मिलना सरकार की कृपा नहीं, बल्कि इमरान का मौलिक अधिकार है। पाकिस्तान की शीर्ष अदालत ने शाहबाज सरकार को साप्ताहिक मुलाकातें सुनिश्चित करने के साथ-साथ इमरान को इस्लामाबाद के शिफा इंटरनेशनल अस्पताल में इलाज कराने और विशेषज्ञ मेडिकल बोर्ड गठित करने का निर्देश दिया। हालांकि, पाकिस्तान की शीर्ष अदालत ने यह शर्त भी रखी कि इलाज के दौरान कोई राजनीतिक गतिविधि या मीडिया से बातचीत नहीं होगी, इस शर्त को इमरान की पार्टी पीटीआई ने स्वीकार किया है। इमरान की सेहत को लेकर चिंता लगातार बनी हुई है, उन्हें रक्तचाप में उतार-चढ़ाव और बेचैनी की शिकायत रही है। जेल में रहते हुए उनकी कई बार मेडिकल जांच हो चुकी है, लेकिन पीटीआई ने मेडिकल दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर सवाल उठाकर स्वतंत्र मेडिकल बोर्ड की मांग की है। वहीं, पाकिस्तान सरकार का कहना है कि इमरान को कानून और अदालत के आदेशों के मुताबिक विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हुई है। इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा राजनीतिक पहलू यही है कि इमरान को जेल में रखकर उनकी राजनीतिक प्रभावशीलता खत्म करने की रणनीति कितनी सफल होगी, इस पर फिर से सवाल खड़े हो गए हैं। सेना प्रमुख असीम मुनीर के नेतृत्व वाले सैन्य प्रतिष्ठान के लिए इमरान अब भी सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती बने हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट का आदेश केवल स्वास्थ्य संबंधी राहत नहीं, बल्कि पाकिस्तान की सत्ता-संतुलन का भी संकेत माना जा रहा है। अदालत ने एक ओर परिवार के अधिकार को मान्यता दी है, दूसरी तरफ पीटीआई को राजनीतिक गतिविधि से दूर रहने को कहा है। इमरान और बुशरा बीबी फिलहाल अदियाला जेल में तोशाखाना-2 मामले में 17 वर्ष की सजा काट रहे हैं, साथ ही उन पर कई अन्य मामले भी लंबित हैं, जिन्हें वे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताते हैं। बहरहाल, असली सवाल यही है कि क्या जेल की दीवारें इमरान की सियासत को रोक पाएंगी? पाकिस्तान की सियासत में इमरान भले जेल में हों, लेकिन उनकी राजनीतिक मौजूदगी खत्म नहीं हुई है और यही बात मौजूदा सत्ता-संरचना के लिए सबसे बड़ी बेचैनी का कारण बनी रह सकती है। आशीष दुबे / 19 अगस्त 2026