एवियन,(ईएमएस)। फ्रांस में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई, जहाँ वह चर्चा का मुख्य केंद्र बिंदु बने रहे। अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ उनकी मुलाकात ने सबसे ज्यादा सुर्खियाँ बटोरीं। ओमान में एक अमेरिकी हमले में तीन भारतीयों की मौत के बाद दोनों देशों के बीच उपजे भारी तनाव के बावजूद, पीएम मोदी ने एक ओर जहाँ अमेरिका पर ‘भरोसे की कमी’ को लेकर कड़ा रुख अपनाया, वहीं दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति को सीढ़ियों पर लड़खड़ाते देख दरियादिली भी दिखाई। जी-7 के मंच से, पीएम मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति के ठीक बगल में बैठकर ‘भरोसे की कमी’ को लेकर अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिका पर निशाना साधा। यह कड़ा रुख दोनों देशों के बीच वर्तमान तनाव का परिणाम माना जा रहा है, जो ओमान में हुई एक दुखद घटना के बाद से और गहरा गया है। इस कड़े रुख के बाद एक ऐसा पल आया जब पीएम मोदी ने मानवीयता का परिचय दिया। यह वाकया जी-7 समिट के दूसरे फैमिली फोटो सेशन और अनौपचारिक कार्यक्रम के दौरान हुआ। जब दुनिया के नेता सीढ़ियां चढ़कर अपनी तय जगह पर खड़े होने के लिए आगे बढ़ रहे थे, तभी अमेरिकी राष्ट्रपति एक छोटे से स्टेप पर चढ़ते हुए थोड़े असहज और लड़खड़ाते दिखे। पीएम मोदी, जो उनके ठीक आगे थे, ने तुरंत अपना हाथ आगे की तरफ बढ़ाया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने उस हाथ को पकड़कर सीढ़ी पार की। इस मदद को लेकर वैश्विक मीडिया में पीएम मोदी के हावभाव की खासी चर्चा हुई। हालांकि, इसके बाद भी अमेरिकी राष्ट्रपति कुछ भ्रमित दिखे और एक मौके पर उन्होंने मेजबान देश के राष्ट्रपति की पत्नी को अनजाने में हल्का धक्का भी दे दिया। इस घटना के बावजूद पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति एक-दूसरे के अगल-बगल खड़े होकर तस्वीर में पोज देते नजर आए। अब पूरी दुनिया की नजरें 17 जून 2026 को होने वाली भारत और अमेरिका की आधिकारिक द्विपक्षीय बैठक पर टिकी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति की इस महत्वपूर्ण मुलाकात में पश्चिम एशिया का संकट सबसे प्रमुख मुद्दा रहेगा। इस हाई-प्रोफाइल बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते पर अंतिम मुहर लगने की उम्मीद है, जिसका मसौदा लगभग पूरा तैयार हो चुका है। इसके अलावा, पिछले एक साल में अमेरिका से भारत के ऊर्जा आयात में 60 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी को देखते हुए ऊर्जा सुरक्षा पर भी बड़ी बात होगी। रूस पर लगे प्रतिबंधों के बीच भारत साफ कर चुका है कि वह केवल गैर-प्रतिबंधित कंपनियों से ही तेल खरीद रहा है। भारत के लिए इस वक्त सबसे बड़ी चिंता ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के समुद्री मार्ग की सुरक्षा है, जहाँ फ्रांस और ब्रिटेन जैसे देशों ने नौसेना सुरक्षा मिशन का प्रस्ताव दिया है। भारत का मानना है कि ऐसे मिशन आवश्यक तो हैं, लेकिन इस भारी तनाव के बीच अभी इनमें शामिल होना सही समय नहीं है, बल्कि यह सब स्थायी शांति के बाद ही मुमकिन होगा। भारत ने एच1बी वीजा’ नीति में हुए हालिया बदलावों से योग्य भारतीयों पर पड़े बुरे असर को लेकर अमेरिका के सामने अपनी चिंताएं खुलकर जताई हैं, और इस मुद्दे पर अमेरिका के साथ एक बेहद सार्थक और मजबूत बातचीत जारी रखेगा। वीरेंद्र/ईएमएस/17जून2026