सुनकर पुतिन भी मुस्कराने लगे एवियन(ईएमएस)। फ्रांस के एवियन में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन की दुनिया भर में व्यापक चर्चा हो रही है। इस वैश्विक मंच पर प्रधानमंत्री ने जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन के एक बेहद मशहूर वाक्य को दोहराया, तो वहां मौजूद राष्ट्राध्यक्ष भी प्रभावित हुए बिना नहीं रह सके। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ठीक बगल में बैठे पीएम मोदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, ‘ट्रस्ट बट वेरीफाई’ यानी ‘विश्वास करो, लेकिन जांच भी करो’। यह केवल एक सामान्य बयान नहीं था, बल्कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य पर भारत का एक बड़ा और सोची-समझी रणनीति से प्रेरित कूटनीतिक संदेश माना जा रहा है। इस बयान के कई गहरे कूटनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। चूंकि डोनाल्ड ट्रंप पूर्व राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन के बड़े समर्थक माने जाते हैं, इसलिए उनके सामने इस वाक्य का इस्तेमाल करना बेहद प्रतीकात्मक था। अपने पिछले कार्यकालों और नीतियों में ट्रंप कई बार भारत के आर्थिक व रणनीतिक हितों के खिलाफ कदम उठा चुके हैं, जिनमें व्यापारिक टैरिफ और एच-1बी वीजा जैसे संवेदनशील मुद्दे प्रमुख रहे हैं। इसके अलावा, वेनेजुएला और ईरान पर सख्त रुख अपना चुके ट्रंप के सामने इस बयान के जरिए भारत ने वैश्विक मंच पर ‘ग्लोबल साउथ’ के एक मजबूत और बेबाक नेता के रूप में अपनी छवि को प्रस्तुत किया। इसके साथ ही, इस बयान का एक सिरा सीधे तौर पर रूस से भी जुड़ता है। अगर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस संबोधन को सुना होगा, तो निश्चित रूप से उनके चेहरे पर मुस्कान आ गई होगी, क्योंकि इस ऐतिहासिक वाक्य की जड़ें सीधे तौर पर रूस के इतिहास से जुड़ी हुई हैं। जी-7 के एक महत्वपूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज दुनिया संसाधनों की कमी से नहीं, बल्कि आपसी विश्वास की कमी से जूझ रही है। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि भविष्य की वैश्विक साझेदारी तभी मजबूत हो सकती है, जब देशों के बीच खोए हुए भरोसे को दोबारा बहाल किया जाए। इसी संदर्भ में उन्होंने रोनाल्ड रीगन के कथन का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘विश्वास करो, लेकिन जांच भी करो’ का सिद्धांत आज के दौर में भी उतना ही प्रासंगिक है। आने वाली पीढ़ियों के लिए हमें एक भरोसेमंद और नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था का निर्माण करना होगा। यदि इस वाक्य के इतिहास पर नजर डालें, तो ‘ट्रस्ट बट वेरीफाई’ भले ही रोनाल्ड रीगन का सबसे लोकप्रिय वाक्य माना जाता हो, लेकिन यह मूल रूप से एक पुरानी रूसी कहावत का अंग्रेजी अनुवाद है। रीगन को यह प्रसिद्ध कहावत उस दौर की अमेरिकी रूस विशेषज्ञ सुजैन मैसी ने सिखाई थी। उन्होंने सलाह दी थी कि सोवियत संघ के नेताओं से बातचीत के दौरान यदि वे रूसी कहावतों का उपयोग करेंगे, तो इससे बातचीत का माहौल बेहतर बनेगा। रीगन को यह कहावत इतनी पसंद आई कि उन्होंने इसे अपनी कूटनीतिक पहचान बना लिया। इस वाक्य का सबसे ऐतिहासिक उपयोग 8 दिसंबर 1987 को देखा गया था, जब अमेरिका और सोवियत संघ के बीच ऐतिहासिक इंटरमीडिएट-रेंज न्यूक्लियर फोर्स संधि पर हस्ताक्षर हो रहे थे। यह शीत युद्ध के दौर में परमाणु हथियारों के प्रसार को नियंत्रित करने वाला दुनिया का सबसे बड़ा समझौता था। इसी मंच से जब रीगन ने ‘ट्रस्ट बट वेरीफाई’ कहा, तो सोवियत नेता मिखाइल गोर्बाचेव मुस्कुराते हुए बोले कि आप हर बैठक में इसी बात को दोहराते हैं, जिसके जवाब में रीगन ने हंसते हुए कहा कि मुझे यह बहुत पसंद है। दरअसल, 1980 के दशक के चरम तनाव के समय रीगन का संदेश साफ था कि समझौते किए जा सकते हैं, लेकिन आंख बंद करके भरोसा नहीं किया जा सकता। इसी कारण इस संधि में इतिहास की सबसे सख्त जांच व्यवस्था बनाई गई थी। प्रधानमंत्री मोदी ने इसी ऐतिहासिक पाठ को आधुनिक संदर्भ में दोहराकर वैश्विक शक्तियों को अपनी प्राथमिकताओं का अहसास कराया है। वीरेंद्र/ईएमएस/17जून2026