ज़रा हटके
17-Jun-2026
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लंदन (ईएमएस)। पहली बार वैज्ञानिकों ने पृथ्वी के भीतर छिपे एक विशाल फंगल नेटवर्क का वैश्विक नक्शा तैयार किया है। वैज्ञानिक भाषा में इसे आर्बस्कुलर माइकोराइजल फंगस कहते हैं, जो पृथ्वी के लगभग 70 प्रतिशत पौधों की प्रजातियों से सीधा जुड़ा है। यह माइकोराइजल फंगस का नेटवर्क लगभग 110 कुआड्रिलियन किलोमीटर यानी 621 ट्रिलियन मील लंबा है। यह दूरी इतनी है कि इससे पृथ्वी और सूरज के बीच की दूरी को करीब एक अरब बार तय किया जा सकता है। यह अंडरग्राउंड नेटवर्क लगभग 45 करोड़ साल से पौधों के साथ मिलकर काम कर रहा है और इसका कुल वजन दुनिया के सभी इंसानों के कुल वजन से छह गुना अधिक आंका गया है। नीदरलैंड की व्रीज यूनिवर्सिटी और स्पन (सोसायटी फॉर द प्रोटेक्शन ऑफ अंडरग्राउंड नेटवर्क्स) के वैज्ञानिकों ने दुनिया भर के नौ अलग-अलग बायोम से मिट्टी के 16 हजार से अधिक सैंपल और मशीन लर्निंग की मदद से इस नेटवर्क की मैपिंग की है। यह फंगस मिट्टी से पोषक तत्व और पानी लेकर पौधों को देता है, बदले में पौधे इसे प्रकाश संश्लेषण से बनी कार्बन देते हैं। सिर्फ एक चम्मच मिट्टी के अंदर ही लगभग 10 मीटर लंबा फंगस नेटवर्क मौजूद हो सकता है। यह अदृश्य प्रणाली हर साल पौधों से लगभग चार अरब टन कार्बन डाइऑक्साइड सोखकर मिट्टी में जमा करती है, जो इंसानों द्वारा फैलाए जाने वाले कुल प्रदूषण का करीब 11 प्रतिशत है। मिट्टी के नीचे कार्बन और पोषक तत्वों का परिवहन 120 माइक्रोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से होता है, जो मानवीय पैमाने पर लगभग 248 मील प्रति घंटे के बराबर है। शोध में एक सरप्राइजिंग तथ्य सामने आया कि इस नेटवर्क की सबसे ज्यादा सघनता उष्णकटिबंधीय वर्षावनों की बजाय घास के मैदानों में है। दुनिया के कुल फंगस बायोमास का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा केवल घास के मैदानों और प्रेयरीज में मौजूद है, जैसे फ्लोरिडा के एवरग्लेड्स और एशिया के तिब्बती पठार। हालांकि, यह अदृश्य साम्राज्य अब खतरे में है। आधुनिक खेती के तरीकों, जैसे कि रासायनिक उर्वरकों और कवकनाशकों का व्यापक उपयोग, साथ ही बार-बार जुताई से इस फंगस नेटवर्क की सघनता में औसतन 47 प्रतिशत की गिरावट आई है। जब पौधों को तैयार उर्वरक मिलते हैं, तो वे फंगस को कार्बन देना बंद कर देते हैं, जिससे मिट्टी की कार्बन जमा करने की क्षमता खत्म हो जाती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि फंगस इस ग्रह के सबसे महत्वपूर्ण लेकिन कम आंके गए जीव हैं। बिना इस नेटवर्क के, धरती का पूरा इकोसिस्टम तबाह हो सकता है। इस ग्लोबल मैपिंग प्रोजेक्ट से फंगस के संरक्षण की मांग तेज हो गई है, क्योंकि इसके 95 प्रतिशत हॉटस्पॉट सुरक्षित क्षेत्रों से बाहर हैं। यह खोज हमें भविष्य में खाद्य सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन जैसी बड़ी चुनौतियों से निपटने में मदद कर सकती है। सुदामा/ईएमएस 17 जून 2026