लेख
19-Aug-2026
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सावन का तीसरे सोमवार 17 अगस्त 2026 श्रद्धालुओं के जीवन पर भारी पड़ गया। इस दिन विभिन्न राज्यों में धार्मिक स्थलों पर हुई भगदड़ और हादसों में कुल 27 लोगों की मौत हो गई। बिहार के लखीसराय स्थित अशोकधाम मंदिर में भगदड़ से 7 श्रद्धालुओं की जान चली गई, जबकि कई अन्य हादसों में कम से कम बीस जान गयीं हैं जबकि हताहतों की तादाद सैकड़ों की संख्या में है। घायल हुए। दरअसल यह हादसों की पहली बार नहीं है हिन्दू धर्म स्थानों पर कुप्रबन्ध अव्यवस्था रखरखाव में गड़बड़ी संकीर्ण गलियारे और श्रद्धालुओं की बढ़ती तादाद असंयमित व्यवहार के साथ ही अफवाहों की साजिशें हर पर्व त्योहार दर्शन स्नान मेलों में हादसों की श्रृंखला बना रहे हैं। आपको बता दें कि बिहार के अशोकधाम मंदिर में सावन के तीसरे सोमवार पर जलाभिषेक के दौरान बिजली का खंभा गिरने और अफवाह फैलने से मची भगदड़ में 7 श्रद्धालुओं की मौत और 19 से अधिक घायल हुए। वहीं मध्य-प्रदेश में उज्जैन के महाकाल मंदिर सहित चार राज्यों में विभिन्न हादसों और भीड़ के दबाव के कारण कुल 27 लोगों की जान चली गई।अभी दो माह पहले ही महाराष्ट्र के परभणी जिले की मानवत तहसील स्थित यशवाड़ी मारुति मंदिर में शनिवार को हुआ दर्दनाक हादसा पूरे देश को झकझोर दिया । मंदिर परिसर के सामने बना सभा मंडप अचानक भरभराकर गिर पड़ा, जिसके कारण कई श्रद्धालु मलबे में दब गए छह लोगों की मौत हो गई थी। आपको याद होगा कि महाकुंभ मेला, प्रयागराज जनवरी 2025 मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर संगम में पवित्र स्नान के लिए लाखों श्रद्धालु एकत्र हुए थे। अखाड़ा मार्ग पर तीर्थयात्रियों के अत्यधिक दबाव से अचानक बैरिकेड्स ढह गए। इस दर्दनाक हादसे में 30 से अधिक लोगों की मौत हुई और 60 से ज्यादा घायल हुए।इसी तरह तिरुमाला वेंकटेश्वर मंदिर, आंध्र प्रदेश में जनवरी 2025 वैकुंठ एकादशी त्योहार के दौरान वीआईपी और सामान्य दर्शन टिकट लेने के लिए हजारों श्रद्धालुओं के बीच धक्का-मुक्की शुरू हुई। इस भीड़ के अनियंत्रित होने से मची भगदड़ में 6 श्रद्धालुओं की मौत हुई और 20 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए। वहीं हाथरस सत्संग, उत्तर प्रदेश 2 जुलाई 2024 को एक धार्मिक आयोजन में बरती गयी लापरवाही सैकड़ों श्रद्धालुओं की जान ले गयी। यह हाल के वर्षों की सबसे भीषण घटनाओं में से एक है। क्षमता से तीन गुना अधिक यानी करीब 2.5 लाख लोग एक अस्थायी टेंट में जमा हो गए थे। बाबा के जाने के बाद धूल छूने की होड़ और अत्यधिक गर्मी व उमस के कारण मची भगदड़ में 121 लोगों की मौत हो गई। पिछले दिनों यूपी के वृन्दावन में इस्कॉन मंदिर के गेट पर नगर निगम द्वारा लगाए गए शॉवर कूलर में अचानक करंट उतर आया। इसकी चपेट में आने से एक 21 वर्षीय श्रद्धालु की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। राजस्थान के खाटू श्याम मंदिर में उमड़ने वाली भारी भीड़, कुप्रबंधन, और उचित कतारें न होने के कारण अक्सर भगदड़ और विवाद जैसी स्थितियां सामने आती है। उत्तर प्रदेश के मथुरा जनपद में स्थित विश्व प्रसिद्ध ठाकुर बांके बिहारी मंदिर के समीप एक हृदयविदारक हादसा सामने आया है। मंदिर के गेट नंबर 5 के पास स्थित एक गली में अचानक एक पुराने मकान का छज्जा गिर गया, जिसकी चपेट में आने से वहां से गुजर रहे कई श्रद्धालु घायल हो गए थे। भारत आस्था और श्रद्धा का देश है। यहां प्रतिदिन लाखों लोग मंदिरों, मस्जिदों, गुरुद्वारों और अन्य धार्मिक स्थलों पर पहुंचते हैं। विशेष अवसरों पर श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में इन स्थानों की संरचनात्मक मजबूती और सुरक्षा व्यवस्था अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। पिछले कुछ वर्षों में देश के विभिन्न हिस्सों में धार्मिक स्थलों पर भगदड़, दीवार गिरने, छत ढहने करेंट उतरने और अन्य दुर्घटनाओं में अनेक लोगों की जान जा चुकी है। हाल ही में महाराष्ट्र के सांगली जिले में भी मंदिर परिसर से जुड़ी एक दुर्घटना में कई श्रद्धालुओं की मृत्यु हुई थी। ऐसी घटनाएं बताती हैं कि समस्या किसी एक स्थान या एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यापक स्तर पर सुरक्षा प्रबंधन की चुनौती है। वास्तविकता यह है कि अनेक धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन आधारभूत ढांचे का विस्तार और रखरखाव उसी गति से नहीं हो पा रहा। कई स्थानों पर अस्थायी शेड, मंडप और अन्य संरचनाएं बिना पर्याप्त तकनीकी परीक्षण के उपयोग में लाई जाती हैं। कई बार निर्माण कार्य स्थानीय स्तर पर करवा लिया जाता है, लेकिन इंजीनियरिंग मानकों और गुणवत्ता नियंत्रण की अनदेखी हो जाती है। जब तक कोई दुर्घटना नहीं होती, तब तक इन कमियों पर गंभीर ध्यान नहीं दिया जाता। प्रत्येक घटना के बाद केवल शोक व्यक्त करना पर्याप्त नहीं होगा। आवश्यक है कि राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन इन हादसों की निष्पक्ष जांच कराएं और इन तमाम हादसों के पीछे के तमाम कारणों का विश्लेषण कर जिम्मेदार दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं पिछले 40 वर्ष से लेखन और पत्रकारिता से जुड़े हैं) (यह लेखक के व्य‎‎‎क्तिगत ‎विचार हैं इससे संपादक का सहमत होना अ‎निवार्य नहीं है) .../ 19 अगस्त /2026