राष्ट्रीय
20-Jun-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने क्रिप्टो करेंसी के माध्यम से संचालित हो रहे विशाल अवैध विदेशी धन हस्तांतरण नेटवर्क का खुलासा किया है। जांच एजेंसी का दावा है कि कुछ कंपनियां भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मंजूरी के बिना चुपचाप विदेशों में पैसा भेजने और मंगाने के काम में लगी थीं, जिसमें शुरुआती जांच में 2,500 करोड़ रुपये से अधिक के फेमा (विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम) उल्लंघन का खुलासा हुआ है। इस मामले में ईडी के बेंगलुरु जोनल कार्यालय ने शहर के 6 ठिकानों पर बड़े पैमाने पर छापेमारी की। ईडी की जांच के दायरे में ट्रांसैक टेक्नोलॉजी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, कैरेटएक्स टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड, मोक्शाग्ना टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड, बायहाटके इंटरनेट प्राइवेट लिमिटेड और अभिभा टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड जैसी कई कंपनियां हैं। ईडी के मुताबिक, ये कंपनियां इंटरनेट पर विदेशी पैसे के लेन-देन का एक आसान तरीका बताकर विज्ञापन करती थीं, जबकि इनके पास अंतर्राष्ट्रीय मनी ट्रांसफर जैसी सेवाएं देने के लिए आरबीआई की कोई अनुमति नहीं थी। ग्राहक कुछ ही क्लिक में पैसा भेजने और हासिल करने में सक्षम थे, लेकिन इन सभी लेनदेन के पीछे नियामक नियमों की घोर अनदेखी हो रही थी। ईडी की जांच में सामने आया है कि ग्राहक पहले प्लेटफॉर्म पर रजिस्ट्रेशन करते थे और अपने बैंक खाते से पैसा जमा करते थे। इसके बाद उस रकम से यूएसडीटी (यूएसटीडी) जैसे स्टेबलकॉइन खरीदते थे। फिर इन क्रिप्टो एसेट्स को अलग-अलग एक्सचेंजों और ओटीसी (ओवर-द-काउंटर) डील्स के द्वारा बेचकर पैसा दूसरे देशों या लाभार्थियों तक पहुंचाया जाता था। ईडी का आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में विदेशी धन प्रेषण से जुड़े जरूरी दस्तावेजों और नियमों का पालन नहीं हुआ। जिससे यह पैसा नियामक निगरानी से काफी हद तक बाहर था। जांच एजेंसी के अनुसार, मोक्शाग्ना टेक्नोलॉजीज खास तौर पर अमेरिका के ग्राहकों से धन जुटाकर उस पैसे को क्रिप्टो में बदलती थी। इसके बाद बड़े पैमाने पर ओटीसी ट्रेडिंग के जरिए नकदी में बदलकर भारत में लोगों तक पहुंचाया जाता था। ईडी का दावा है कि कंपनी का मुख्य संचालक अमेरिका में बैठकर भारत में मौजूद अपने परिवार के सदस्यों की मदद से पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा था। वहीं, ट्रांसैक टेक्नोलॉजी पर बिना आरबीआई की मंजूरी के ऑफ-रैम्प सेवाएं चलाने का आरोप है। छापेमारी के दौरान ईडी को टैक्स हेवन देशों में बनी शेल कंपनियों, बड़े ओटीसी सौदों और विदेशी क्रिप्टो प्लेटफॉर्म्स के जरिए कथित अवैध धन हस्तांतरण के कई अहम सुराग मिले हैं। प्रारंभिक जांच में 2,500 करोड़ रुपये से ज्यादा के अनधिकृत सीमा-पार ट्रांसफर का पता चला है। ईडी ने कार्रवाई कर कुछ कंपनियों के बैंक खातों पर भी रोक लगा दी है, जिसमें करीब 6 करोड़ रुपये जमा पाए गए हैं। यह कार्रवाई क्रिप्टो स्पेस में बढ़ते वित्तीय अपराधों और नियामक उल्लंघन पर एक गंभीर चेतावनी है। आशीष दुबे / 20 जून 2026