नई दिल्ली (ईएमएस)। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस और पर्यटन राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने बताया कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का मतलब यह नहीं है कि भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम तुरंत कम हो जाएंगे। उन्होंने बताया कि घरेलू ईंधन कीमतों का निर्धारण कई कारकों पर निर्भर करता है, इसमें कम कीमत पर खरीदे गए कच्चे तेल के भारत पहुंचने में लगने वाला समय महत्वपूर्ण पहलू है। राज्य मंत्री गोपी ने कहा कि हॉरमुज जलडमरूमध्य जैसे व्यस्त समुद्री मार्गों से कम कीमत वाले कच्चे तेल के भारत पहुंचने में समय लगता है, इससे तुरंत कीमतों में कमी संभव नहीं है। उन्होंने जोर दिया कि इस साल पश्चिम एशिया में हुए संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता पैदा की, जिसका सीधा असर सरकारी तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) पर पड़ा। राज्य मंत्री गोपी ने बताया कि उपभोक्ताओं को बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों के प्रभाव से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने अतिरिक्त बोझ का बड़ा हिस्सा खुद वहन किया। इस प्रक्रिया में केंद्र सरकार को करीब 12,000 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने बताया कि ऊंची ईंधन कीमतों के दौरान किसी भी राज्य सरकार ने अपने करों में कटौती करके राजस्व नहीं छोड़ा, जबकि केंद्र और तेल कंपनियों दोनों को अपना परिचालन जारी रखना है। राज्य मंत्री गोपी ने पुनः साफ किया कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें केवल अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के भाव पर निर्भर नहीं करतीं, बल्कि बाजार और परिवहन से जुड़े कई अन्य आंतरिक और बाहरी कारकों को भी ध्यान में रखा जाता है। गौरतलब है कि गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, जहां ब्रेंट क्रूड करीब 1.64 प्रतिशत गिरकर 78 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार कर रहा था, और अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड भी करीब 2 प्रतिशत घटकर 75 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। कच्चे तेल की इन कीमतों में गिरावट पश्चिम एशिया में तनाव कम करने की दिशा में हुई कूटनीतिक प्रगति के बाद देखी गई है, जिससे निवेशकों को उम्मीद है कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव कम होगा। आशीष दुबे / 18 जून 2026