नई दिल्ली,(ईएमएस)। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के उस बयान पर अपनी कड़ी असहमति जाहिर की है, जिसमें सीएम नायडू ने केंद्र के प्रस्तावित परिसीमन ढांचे का बचाव किया था। कांग्रेस नेता थरूर ने एक विचार-प्रयोग के द्वारा समझाया कि सभी राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या में आनुपातिक वृद्धि के बावजूद राजनीतिक प्रभाव बड़े राज्यों की ओर ही झुकेगा। सीएम नायडू ने हाल ही में संसद में संविधान संशोधन विधेयक को रोकने के लिए विपक्ष की आलोचना कर कहा था कि परिसीमन को लेकर जाहिर की जा रही चिंताएं बेबुनियाद हैं। अप्रैल में संसद के विशेष सत्र के दौरान प्रस्तुत किए गए संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 में लोकसभा की सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करने और परिसीमन को 2011 की जनगणना से जोड़ने का प्रस्ताव था। इसमें सभी राज्यों के लिए लोकसभा सीटों में 50 प्रतिशत की आनुपातिक वृद्धि का प्रावधान भी शामिल था। हालांकि, यह विधेयक आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका और पारित होने के लिए आवश्यक 352 मतों के मुकाबले केवल 298 सदस्यों का समर्थन ही प्राप्त कर पाया, जबकि 230 सदस्यों ने इसका विरोध किया था। नायडू के इस बयान पर प्रतिक्रिया देकर थरूर ने एक अख़बार की क्लिपिंग साझा की, जिसकी हेडलाइन थी नायडू ने कहा परिसीमन बिल 50 प्रतिशत सीट बढ़ोतरी के प्रावधान के साथ वापस आएगा। उन्होंने नायडू को संबोधित करते हुए लिखा, नायडू जी, आइए एक सोच-विचार वाला प्रयोग करते हैं। मान लीजिए आपकी सैलरी 2 लाख है और आपके ड्राइवर की 20,000 है। आप सभी के लिए 50 प्रतिशत बढ़ोतरी का ऐलान करते हैं। अब आपकी सैलरी 3 लाख हो जाती है और आपके ड्राइवर की 30,000। थरूर ने समझाया, प्रतिशत या अनुपात के हिसाब से बढ़ोतरी तब एक जैसी है-लेकिन क्या आप अपने ड्राइवर की तुलना में और पहले की अपनी स्थिति की तुलना में, कहीं बेहतर स्थिति में नहीं हैं? थरूर ने तर्क दिया कि दक्षिणी राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने ठीक यही चिंता जाहिर की है कि भले ही सीटों में बढ़ोतरी का अनुपात एक जैसा रहे, फिर भी राजनीतिक संतुलन काफी बदल जाएगा। उन्होंने उदाहरण देकर पूछा, क्या सच में कोई फर्क नहीं पड़ेगा अगर उत्तर प्रदेश के सांसदों की संख्या 80 से बढ़कर 120 हो और केरल के सांसदों की संख्या 20 से बढ़कर 30 हो जाए? उन्होंने कहा कि भले ही संख्या का अनुपात एक जैसा रहे, लेकिन राजनीतिक वज़न में भारी अंतर (केरल के 10 और सांसदों के मुकाबले यूपी के 40 और सांसद) एक गंभीर चिंता का विषय बना रहेगा। इस विचार-प्रयोग के माध्यम से थरूर ने यह स्थापित करने का प्रयास किया कि सभी राज्यों में सीटों की संख्या में केवल आनुपातिक बढ़ोतरी से राजनीतिक संतुलन बना रहेगा, यह ज़रूरी नहीं है, खासकर दक्षिणी राज्यों के लिए, जो लंबे समय से आबादी पर आधारित परिसीमन प्रक्रिया में नुकसान होने की आशंका जता रहे हैं। आशीष दुबे / 18 जून 2026