मंदिर में करोड़ों के दान में हुए हेरफेर पर घमासान अयोध्या(ईएमएस)। अयोध्या में राम जन्मभूमि परिसर, करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र, इन दिनों करोड़ों रुपये के दान में कथित अनियमितताओं को लेकर राष्ट्रीय सुर्खियों में है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) मामले की गहराई से पड़ताल कर रहा है। हालांकि, कई शिकायतें दर्ज होने के बावजूद अब तक एफआईआर दर्ज न होना विवाद का मुख्य बिंदु बना हुआ है, जिससे राजनीतिक माहौल भी गरमा गया है। लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन के नेतृत्व वाली एसआईटी लगातार दूसरे दिन सक्रिय रही। जांच दल ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और प्रशासक गोपाल राव से अलग-अलग गहन पूछताछ की। इस दौरान दान की निगरानी व्यवस्था, प्रशासनिक प्रक्रियाओं, दानपात्रों की संख्या, रखरखाव और संग्रहण से जुड़े रिकॉर्ड पर विस्तार से चर्चा हुई। टीम ने मंदिर परिसर में लगे सभी सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग को बारिकी से देखा और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी अपने कब्जे में लिए। जांच दल ने रामलला को प्राप्त आभूषणों और बहुमूल्य धातुओं के रखरखाव वाले कक्ष का भी निरीक्षण किया, जो गर्भगृह के सामने स्थित है। इसकी जिम्मेदारी संभालने वाले ट्रस्ट कर्मचारी कृष्णदेव तिवारी से भी पूछताछ की गई। अधिकारियों को बताया गया कि दान राशि की गिनती में करीब 40 लोग शामिल होते हैं, जिनमें ट्रस्ट, भारतीय स्टेट बैंक और संग्रहण एजेंसी से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं। ये सभी कर्मचारी अब जांच के दायरे में हैं। यह विवाद 7 जून को तब शुरू हुआ, जब समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए करोड़ों रुपये के चढ़ावे में अनियमितताओं का आरोप लगाया और न्यायालय से संज्ञान लेने की मांग की। फिलहाल, सबकी निगाहें एसआईटी की रिपोर्ट पर टिकी हैं। क्या वाकई कोई गड़बड़ी हुई है या आरोप निराधार हैं, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। अयोध्या में राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक है, ऐसे में इस मामले की गहन और पारदर्शी जांच अत्यंत महत्वपूर्ण है। तीन शिकायतें, पर एफआईआर क्यों नहीं विवाद का सबसे बड़ा पहलू यह है कि धर्म सेना के नेता संतोष दुबे, उत्तर प्रदेश युवा कांग्रेस के उपाध्यक्ष शरद शुक्ला और एक अन्य व्यक्ति द्वारा राम जन्मभूमि थाने में शिकायतें दर्ज कराने के बावजूद, पुलिस ने अभी तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की है। इस देरी पर विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों द्वारा गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरजपाल अम्मू ने एफआईआर में देरी पर सवाल उठाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक तेज नारायण पांडेय ने इस मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कराने की मांग की है, ताकि निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा गठित एसआईटी की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि मंदिर ट्रस्ट का गठन सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर हुआ था, इसलिए इस मामले में अदालत की निगरानी जरूरी है। पांडेय ने यहां तक मांग कर दी कि आरोपों का सामना कर रहे ट्रस्ट सदस्यों को जांच पूरी होने तक मंदिर परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए। वीरेंद्र/ईएमएस/18जून2026