राष्ट्रीय
17-Jun-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के 657 करोड़ रुपये के एफडी घोटाले से जुड़े मामले में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के पंचकूला स्थित आवास पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई तब हुई है जब सीबीआई मामले में पहले ही चार्जशीट दाखिल कर चुकी है और मनी ट्रेल और बड़े वित्तीय धोखाधड़ी में अन्य आईएएस अधिकारियों की भूमिका की गहन जांच कर रही है। मामले की गंभीरता को देखकर सीबीआई ने हाल ही में दो अलग-अलग चार्जशीट विशेष सीबीआई अदालतों में दाखिल की थीं। पहली चार्जशीट हरियाणा सरकार के फंड के दुरुपयोग से जुड़ी है, जिसमें चंडीगढ़ के रियल एस्टेट निवेशक विक्रम वधवा और सावन ज्वैलर्स के मालिक राजन सिंह कदोदिया को अपराध से अर्जित धन का लाभार्थी बताया गया है। इससे पहले, मामले में तीन सरकारी कर्मचारियों, छह बैंक अधिकारियों और चार निजी व्यक्तियों सहित 15 आरोपितों और कंपनियों के खिलाफ भी चार्जशीट दाखिल की जा चुकी थी। दूसरी चार्जशीट चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (सीएससीएल) से जुड़े मामले में दाखिल की गई है, जिसमें पांच बैंक अधिकारियों, सीएससीएल के एक अधिकारी और एक निजी व्यक्ति सहित सात आरोपित नामजद हैं। जांच में सामने आया है कि 250 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सावन ज्वैलर्स के माध्यम से कई कंपनियों, जिनमें रिभव ऋषि, अभय कुमार और अभिषेक सिंगला जैसे नाम शामिल हैं, को स्थानांतरित की गई थी। इन कंपनियों में सरकारी खातों से अवैध तरीके से पैसा ट्रांसफर किया गया था। प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि सावन ज्वैलर्स के मालिक राजन ने मुख्य आरोपितों के लिए नकद रूपांतरण का काम किया और इसके लिए भारी कमीशन लिया, जिसमें सोने की वस्तुओं की बिक्री फर्जी तरीके से दिखाई गई। वहीं, वधवा पर हरियाणा सरकार, चंडीगढ़ निगम और दो निजी स्कूलों के बैंक खातों से करोड़ों का गबन करने का आरोप है। ईडी के अनुसार, उनके निजी खाते में 70 करोड़ रुपये से अधिक की रकम पहुंची थी, जिसे बाद में शेल कंपनियों जैसे कैपको फिनटेक सर्विसेज और स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स के जरिए वैध दिखाने की कोशिश की गई। सीबीआई ने हरियाणा सरकार के आठ विभागों से संबंधित लगभग 504 करोड़ रुपये और चंडीगढ़ प्रशासन से संबंधित 153 करोड़ रुपये के नुकसान का आकलन किया है। कुल मिलाकर यह घोटाला 657 करोड़ रुपये का है। इन मामलों की जांच विभिन्न राज्य एजेंसियों से सीबीआई को सौंपी गई थी। केंद्रीय जांच एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि जांच अभी भी जारी है और आने वाले समय में और भी चार्जशीट दाखिल की जा सकती हैं, जिससे इस बड़े वित्तीय धोखाधड़ी के सभी पहलुओं का खुलासा हो सके। आशीष दुबे / 17 जून 2026