टीएमसी में टूट पर भड़के कीर्ति आजाद बागी सांसदों पर साधा निशाना -कहा- सत्ता के लिए पार्टी छोड़ने वाले बागी नहीं, भगोड़े हैं नई दिल्ली,(ईएमएस)। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में हालिया राजनीतिक उठापटक और कुछ सांसदों के पार्टी से अलग होने के बाद पार्टी सांसद कीर्ति आजाद ने बागी नेताओं पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि ऐसे नेताओं को बागी कहना स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान होगा, क्योंकि वे लोग जिस पार्टी के सहारे आगे बढ़े, उसी को मुश्किल समय में छोड़कर चले गए। एक बातचीत में कीर्ति आजाद ने कहा कि बागी शब्द का इस्तेमाल सोच-समझकर किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनके पिता समेत लाखों लोगों ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष किया था और वे वास्तविक अर्थों में बागी थे। वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कुछ नेता सत्ता का लाभ उठाने के बाद मुश्किल समय आने पर पार्टी छोड़ देते हैं। कीर्ति आजाद ने कहा, किसी भी राजनीतिक दल की असली ताकत उसके कार्यकर्ता होते हैं। उनके अनुसार विधायक और सांसद सीमित संख्या में होते हैं, जबकि पार्टी को खड़ा करने और मजबूत बनाने का काम लाखों कार्यकर्ता करते हैं। उन्होंने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के सांसदों को जनता ने विपक्ष की भूमिका निभाने का जनादेश दिया था। ऐसे में चुनावी हार के बाद दल छोड़कर जाना राजनीतिक अवसरवाद को दर्शाता है। बीजेपी से ऑफर मिलने का भी किया दावा कीर्ति आजाद ने दावा किया कि उन्हें भी भारतीय जनता पार्टी की ओर से राजनीतिक प्रस्ताव मिला था, लेकिन उन्होंने उसे स्वीकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि उनका संबंध लंबे समय से ममता बनर्जी से रहा है और कठिन समय में ममता बनर्जी ने उनका साथ दिया था। उन्होंने यह भी कहा कि वे पहले भाजपा में थे, लेकिन दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाने के बाद उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया गया था। बाद में 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने तृणमूल कांग्रेस का दामन थामा और सांसद निर्वाचित हुए। टीएमसी में किसी आंतरिक संकट से किया इनकार पार्टी के भीतर मतभेदों की चर्चाओं को खारिज करते हुए कीर्ति आजाद ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस में कोई बड़ा आंतरिक संकट नहीं है। उनके मुताबिक, चुनावी हार के बाद कुछ नेताओं ने अलग रास्ता चुना है, लेकिन इससे पार्टी की मूल संरचना प्रभावित नहीं होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा का उद्देश्य क्षेत्रीय दलों को कमजोर करना है। इस संदर्भ में उन्होंने महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की शिवसेना, शरद पवार की पार्टी और अन्य क्षेत्रीय दलों के विभाजन का भी उल्लेख किया। लोकसभा अध्यक्ष से अयोग्यता की मांग कीर्ति आजाद ने बताया कि पार्टी नेतृत्व की ओर से लोकसभा अध्यक्ष को पत्र भेजकर बागी सांसदों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस का मानना है कि यदि सांसद किसी अन्य दल में शामिल होते हैं तो दलबदल विरोधी कानून के तहत उनकी सदस्यता समाप्त की जा सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी इस मुद्दे को संवैधानिक और कानूनी तरीके से आगे बढ़ाएगी तथा अंतिम निर्णय संबंधित संसदीय और न्यायिक प्रक्रियाओं के अनुसार होगा। हिदायत/ईएमएस 17जून26