दो सांसदों ने उद्धव के साथ होने का किया दावा, शिंदे गुट में शामिल होने वाली खबरों को बताया फर्जी नई दिल्ली,(ईएमएस)। महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों की संभावित बगावत को लेकर चल रही अटकलों के बीच नया मोड़ आ गया है। पार्टी के दो सांसदों ने सार्वजनिक रूप से उद्धव ठाकरे के प्रति अपनी निष्ठा दोहराते हुए शिंदे गुट में शामिल होने की खबरों को खारिज कर दिया है। इन बयानों के बाद शिवसेना (यूबीटी) में बड़ी टूट की चर्चाओं को फिलहाल झटका लगा है। दरअसल, हाल ही में उद्धव ठाकरे द्वारा मातोश्री में बुलाई गई आपात बैठक में नौ में से केवल चार सांसदों के पहुंचने के बाद पार्टी में असंतोष और संभावित बगावत की अटकलें तेज हो गई थीं। इसी बीच कुछ सांसदों के नई दिल्ली पहुंचने से राजनीतिक हलकों में चर्चाएं और बढ़ गई थीं। हालांकि, नासिक से सांसद राजाभाऊ वाजे ने दिल्ली पहुंचने के बाद स्पष्ट किया कि वह पूरी तरह उद्धव ठाकरे के साथ हैं। उन्होंने कहा कि उनका किसी अन्य राजनीतिक दल या नेता से कोई संपर्क नहीं है और न ही उन्हें किसी प्रकार का प्रस्ताव मिला है। वाजे ने कहा, मैं उद्धव ठाकरे के साथ हूं और आगे भी उनके साथ ही रहूंगा। मुझे कोई कॉल नहीं आया है और न ही शिंदे जी ने मुझसे संपर्क किया है। मैं किसी बात से नाराज नहीं हूं। दिल्ली मैं एक समिति की बैठक में भाग लेने आया हूं। इसी तरह सांसद संजय पाटिल ने भी शिंदे गुट में शामिल होने की अटकलों को नकार दिया है। दोनों नेताओं के रुख के बाद यूबीटी में टूट की संभावनाओं को लेकर उठ रहे सवालों पर फिलहाल विराम लगता दिखाई दे रहा है। सूत्रों के अनुसार, बागी बताए जा रहे सांसदों की ओर से लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात की संभावना को लेकर चर्चा जारी है। हालांकि, अभी तक कोई औपचारिक कदम सामने नहीं आया है। जानकारी यह भी सामने आई है कि श्रीकांत शिंदे की लोकसभा अध्यक्ष से तत्काल मुलाकात तय नहीं है। पहले संभावित बागी गुट को अपना पक्ष लिखित रूप में प्रस्तुत करना होगा, उसके बाद ही आगे की प्रक्रिया हो सकती है। इस बीच यह भी स्पष्ट किया गया है कि शिंदे के आवास पर सुबह किसी प्रकार की बैठक नहीं हुई, जिससे बगावत की खबरों को और बल मिलने की संभावना फिलहाल कम हो गई है। लोकसभा में शिवसेना (यूबीटी) के कुल नौ सांसद हैं। दलबदल विरोधी कानून के तहत किसी अलग समूह को मान्यता प्राप्त करने के लिए दो-तिहाई सदस्यों का समर्थन आवश्यक होता है। ऐसे में संभावित बागी गुट को कम से कम सात सांसदों का समर्थन जुटाना होगा। मौजूदा स्थिति में यह संख्या पूरी होती नजर नहीं आ रही है। उधर, दिल्ली पहुंचे राजाभाऊ वाजे को पार्टी सांसद संजय राउत के आवास पर बुलाया गया है। माना जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच मुलाकात के बाद पार्टी की रणनीति और स्थिति को लेकर अधिक स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकती है। फिलहाल, दो सांसदों के खुलकर उद्धव ठाकरे के समर्थन में आने से महाराष्ट्र की राजनीति में चल रहे संभावित नंबर गेम का समीकरण बदलता दिखाई दे रहा है और यूबीटी में तत्काल बड़ी टूट की संभावना कमजोर पड़ती नजर आ रही है। हिदायत/ईएमएस 17जून26