नई दिल्ली (ईएमएस)। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग ने खुलासा किया है कि एक बार जब वह तिहरे शतक के बेहद करीब पहुंच गये थे तो कप्तान रहे राहुल द्रविड़ की सलाह के कारण उसे पूरा नहीं कर पाये थे। सहवाग को एक ऐसे विस्फोटक बल्लेबाज के तौर पर याद किया जाता है जो क्रिकेट की पारंपरिक शैली को अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से बदलने में सफल रहा है। वहीं अपनी धुआंधार शुरुआत से वे न केवल विपक्षी गेंदबाजों पर दबाव बनाते थे, बल्कि टेस्ट मैच जीतने के लिए एक नया रवैया भी पेश करते थे। भारत के लिए टेस्ट में दो तिहरे शतक लगाने वाले वह एकमात्र बल्लेबाज हैं पर एक ऐसा अवसर आया जब वह अपने तीसरे तिहरे शतक के बेहद करीब पहुंच गए थे पर द्रविड़ की एक सलाह के कारण वे यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करने से चूक गए। सहवाग ने ये भी कहा कि द्रविड़ की बात मानकर उन्होंने अपने करियर की एक बड़ी गलती कर दी थी। ये मामला साल 2009 का है। तब मुंबई में श्रीलंका के खिलाफ खेले गए टेस्ट मैच में सहवाग अपनी स्वाभाविक शैली में बल्लेबाजी करते हुए दूसरे दिन के खेल में टीम को बेहद मजबूत स्थिति में पहुंचा चुके थे। उन्होंने एक ही दिन में रिकॉर्ड 284 रन बना दिए थे। क्रीज पर टिके सहवाग अपने टेस्ट करियर के तीसरे तिहरे शतक से करीब थे। वहीं जब दिन का खेल खत्म होने में कुछ ओवर बाकी थे, तब द्रविड़ ने उनसे बात की। द्रविड़ ने सहवाग को सलाह दी कि अब जोखिम लेने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि दिन का खेल समाप्त होने वाला है। उन्होंने सहवाग से कहा, आज विकेट बचाकर खेलो, अगली सुबह आकर आराम से अपने 300 रन पूरे कर सकते हो। तुम्हारे पास 400 रन बनाने का भी मौका होगा। द्रविड़ की यह सलाह सहवाग को सही लगी ओर वह बचे हुए ओवर सावधानी से खेलने लगे। दिन का खेल खत्म होने तक दोनों बल्लेबाज नाबाद रहे, और सहवाग को पूरा विश्वास था कि अगली सुबह वह अपना तिहरा शतक आसानी से पूरा कर लेंगे। वह अगले दिन पूरे आत्मविश्वास के साथ मैदान पर उतरे लेकिन 293 रन बनाकर आउट हो गए। श्रीलंका के दिग्गज स्पिनर मुथैया मुरलीधरन ने अपनी ही गेंद पर उनका कैच लपककर उन्हें इतिहास रचने से रोक दिया। सहवाग ने अपनी इस विस्फोटक पारी में केवल 254 गेंदों का सामना किया था, जिसमें 40 चौके और 7 छक्के शामिल थे। यह एक ऐसी पारी थी जो हमेशा उनकी आक्रामक शैली का प्रतीक रहेगी। सहवाग ने कहा कि किया कि उन्हें दूसरे दिन के आखिरी ओवरों में अपनी स्वाभाविक आक्रामक बल्लेबाजी जारी रखनी चाहिए थी। उन्हें इस बात का गहरा अफसोस हुआ कि उन्होंने द्रविड़ की सलाह मानी। उन्होंने यह भी बताया कि आउट होने के बाद वह मजाकिया तौर पर ही सही, लेकिन द्रविड़ को उनकी सलाह के लिए जमकर कोस रहे थे। गिरजा/ईएमएस 16जुलाई 2026